Shadi Mein Rukawat Dor Karne Ka Wazifa

Shadi Mein Rukawat Dor Karne Ka Wazifa

Shadi Mein Rukawat Dor Karne Ka Wazifa,”  लड़का या लड़की की शादी का पैगाम नहीं आता हों या रुकावटें पैदा होते हों या बार रिश्ता तय होने के बाद टूट जाता हों तो चाहिए की वक़्त साद में इस दुआ को जाफ़रान से लिखकर इस लड़के या लड़की के गले में लटकायें इन्शा अल्लाह रिश्ता और रिश्ता की पुखतगी का सामान गैब से हो जायेगा. तावीज़ को ख़ूब अच्छी तरह मोम जमा करें या कई बार पाक प्लास्टिक में ख़ूब अच्छी तरह लपेट ले ताकि पसीना या ग़ुस्ल का पानी वहां तक सरायत न करें.

जब तावीज़ को मोम जमा कर दिया जाये या प्लास्टिक में ख़ूब अच्छी तरह लपेट दिया जाये तो इसके साथ ग़ुस्ल खाने या इस्तंजा खाने के अंदर जाने में कोई हरज नहीं है. ये तावीज़ इस वक़्त तक गले में पढ़ी रहे जब तक कि बख़ैर व ख़ूबी शादी न हो जाये. शादी हो जाने के बाद तावीज़ को बहते पानी में डाल दिया जाये और फ़क़ीरों पर कुछ सदक़ा कर दिया जाये.

तावीज़ अगर मर्द के लिए है तो बजाये

के अखीर तक ये लिखना चाहिए.

नोट:– दुआ मज़कूरा के लिखते वक़्त इस बात का ख़्याल रहें कि जिन हुरूफ़ कि आंखें खुली हैं इसको खुली ही रहनी चाहिए मसलन

वगैरह. तावीज़ मज़कूरा जब किसी ग़ैर मुस्लिम को देनी हो तो इस नक़्श कि सूरत में दी जायें.

ये आयात व नक़्श भी दुख्तर नाक़तखदा के बख़्ते ख़्वाबीदा को बेदार करने के लिए ख़ास हैं लड़कों के लिए भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता हैं. तावीज़ आवेज़ा हो जाने के बाद चिल्ला पूरा नहीं होगा कि ग़ैब से जोड़ो का सामना पूरा हो जायेगा. ये तावीज़ भी साअत साअद में जाफ़रान से लिखी जाएगी.

नोट:– जिन तावीज़ो को जाफ़रान से लिखने कि हिदायत कि गयी हैं अगर जाफ़रान या मुश्क दस्तियाब न हो तो किसी भी पाक रोशनाई से लिख सकते हैं.

नोट:– यही तावीज़ अगर किसी ग़ैर मुस्लिम को देनी हो तो बजाये आयाते मज़कूरा के नक़्श बाला के साथ ये नक़्श दी जायें