MIYA BIWI ME MOHABBAT PAIDA KARNE KA AMAL

Miya Biwi Me Mohabbat Paida Karne Ka Amal , ” yadi miya biwi me mohabbat na ho to is naqsh ko likh kar kisi tree pr latkaya jaye insaallah thode din me miya biwi me aesi mohabbat hogi ki log tajob krege.

ya kadir fala bin fala ko kr hazir. is amal ko dariya ke kinare bet kr 11 din tak or 1100 so baar hr din parde or roj parde apne sath chawal aik tola , sakar aik tola, aik tola gi , aik tola le jaye kre or dariya me dale or dalne ke time ye kahe he hazart khijar alohi ye aapki fatiha pes ki ja rahi h ise kabol kre ye amal jumma ko suru kr ke or bich me jumma raat aaye us din sakrana pkakar kisi garib mohtaz ko khila de insaallah allah  Miya Biwi Me Mohabbat  itni ho jaye gi aap dekar heran rahe jayo ge.

मिया बिवाई मी मोहब्बत पेड करना का आमल, “यदी मैल्या जीव में मुझे मुहब्बत ना हो रहे हैं ना कुछ को प्यार करता है तो पेड़ की पीठ लेटेके जाये इन्साल्लाह थोड दीन मी म्या वाइ मेई अस्सी मोहब्बत होजी की लॉग तजाब क्रेजे।

फिर कादिर फर्ना बिन पर्ला को केआर हज़िर क्या होता है दिल की किने में बेट की 11 दिन की या 1100 इतने बर घंटे के बाद या रोड़ पर अपना आना चपल आइका तोला, सकर आइका तोला, अलिक टूला जी, आइका तोला ले जये करे या दरिया मेरा डेल या दलेने के समय तुम कहें वह हज़रत खजोर अलोही आप आकी फतिहा पासे की जाये राम हैं ये कैब कर थे अमल जुम्मा को सुरू कर या बैच मुझे जुम्मा रात आये ये दिन सिक्राने के लिए गरिब मोहताज को ख़िला देसल्लाह अल्लाह मिया बिवी मी मोहब्बत इन्नी हो जाए तुम जी आप कर हुन जाने जीए जीई